सोमवार, 29 नवंबर 2010

To, Mr. Rahul Gandhi

प्रिय राहुल गाँधी जी,
                              शुभ अभिनन्दन !
बिहार विधान सभा के नतीजे आ चुके हैं और दुर्भाग्य से परिणाम कांग्रेस के लिए बेहद ही निराशाजनक हैं. लोकतंत्र में चुनाव जीतना और हारना उतना महत्त्वपूर्ण नहीं  है जितना  यह की लोकमत को सहर्ष स्वीकार करते हुए लोक कल्याण के कार्यों में लगे रहें. आशा है एवं विश्वाश भी की आप जैसा जुझारू एवं कुशल, सुलभ युवा नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण व्यक्ति इस हर को एक नए चुनौती के रूप में स्वीकार करेगा एवं चुनावों के दौर की भांति ही बिहार के उन सुदूर दुर्गम गाँवों में रहने वाली सैकड़ों कलावातियों के घर रात बिताकर उनके आवाज को बुलंदी प्रदान करता रहेगा. 
          
बिहार विधानसभा चुनावों में हमारी अपनी कांग्रेस का इस तरह पिट  जाना एक गहन  चिंतन का विषय है. मुझे पूरा विश्वाश था की आपका करिश्माई व्यक्तित्व बिहार विधानसभा में हमारे सदस्यों की संख्या जादूई आंकड़े तक ले जायेगा. मगर कभी कभी परिणाम प्रतिकूल भी आते हैं. हम बिहारियों  की यही बीमारी है की हम जो भी सीखते हैं उसे आपस में जरूर बाँटते हैं. हमारे स्कूल के मास्टरजी सीखाते थे की यदि तुम सर्वोतम के लिए प्रयास कर रहे हो तो विकटतम के किये तैयार रहो. वे कहते थे की चाँद पर जाने की महत्वाकांक्षा लिए यान भी कभी-कभी फुस्स  कर जाता है, सो विचलित हुए बिना ही पुनः प्रयास आरम्भ करना चाहिए. क्या हुआ की १२२ तक के जादूई आंकड़े तक जाने की आकांक्षा पंच समाज (पाँच सदस्यों) तक भी नहीं पहुँच पाई. कोशिशें जारी रखिये मंजिले अभी बाकि  हैं.

राहुल जी, यह सबको पता है की सरकार बदल जाने मात्र से उस आम निरीह वर्ग पर शायद ही कोई प्रभाव पड़ता है जो आज अपने मूल मानव अधिकारों से वंचित यह भी भूल गया है की वह मानव है या नहीं, उस आम सर्वहारा वर्ग को सशक्त  बनाने में जो पहल आपने  की है वह प्रशंशनीय है. आपने अपने दिल्ली के वातानुकूलित कमरों से निकलकर आमजन के प्रतिनिधि के रूप  में आमजनों  के बीच जो समय आम चुनावों के समय बिताये है उसे यह जनता अच्छी तरह से समझती है. आशा है आप वह क्रम बिना रुकावट चुनाव परिणामों  के बाद भी जारी रखेंगे. बिहार की जनता को आपसे कई उम्मीदें है, बिहार की करोड़ों कलावतियाँ आपकी राह  देख रही हैं.

राहुल जी, चुनावों के दौरान आपने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाये, जिसमे से सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बिहारी स्वाभिमान की थी. आपने बेहद ही आक्रामक अंदाज में तत्कालीन सरकार पर आरोप लगाये की जब असम और महाराष्ट्र में बिहारी पिट रहे थे, गोवा के मंत्री उनकी तुलना कुत्तों से कर रहे थे और और दिल्ली की मुख्यमंत्री दिल्ली की  गन्दगी का जिम्मेदार बता रही थीं तब हमारे नेता क्या कर रहे थे. सचमुच ! किसी के पास कोई जबाब  नहीं था. सरकार के पास बहाने   बनाने  और बंसी बजाने के अलावा कोई काम   नहीं था. आपको जनता को यह बताना चाहिए था  की जब हमारे निर्वाचित संसद सदस्य इस्तीफा-इस्तीफा खेल रहे थे उस समय हमारे द्वारा निर्वाचित हमारे प्रधानमंत्री ने हमारे हितों की रक्षा के लिए क्या क्या ठोस कदम उठाये. आपको यह भी बताना चाहिए था की जब राज ठाकरे से मिलने की मांग करने वाले राहुल को एक फिट की दूरी से सीने पर गोली मारी गयी थी तो कैसे आपकी सरकार का सीना कैसे  दर्द से फट गया था. राहुल जी, हमारे उस  राहुल की मासूम  आत्मा आज भी अपने लिए न्याय मांग रही है जिसे महाराष्ट्र के किसी फाइल  में लिपा पोती कर के कहीं दफन दिया गया है. आशा है आप दिल्ली में दमन का शिकार हुए हमारे हकों को नयी आवाज देंगे. राहुल जी, मुझे अपने प्रधानमंत्री की दरियादिली भी यह सोचने पर मजबूर कर देती है की आखिर हमारी जनता ने उनका ख्याल क्यों नहीं रखा. बिहार के प्रति उनके अपार प्रेम को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है. हमारे मुख्यमंत्री उन्हें पिछले पाँच वर्षों से बिहार आने का न्योता दे रहे थे मगर वस्ताता के कारन उन्हें समय नहीं मिल रहा था. मगर संवैधानिक पंचवर्षीय मेले में जब जनता ने एक बार बुलाया तो वे तमाम व्यस्तताओं  के बीच समय निकल कर भागे चले आये. आपने भी ट्रेन के साधारण डब्बे में साधारण लोगों के साथ सफ़र कर उनके कष्टों को अनुभव करने का जो असाधारण काम किया वो अपने  आप में एक उदहारण है. बिहार की ट्रेनों में चलने वाली जनता आपके साथ कुछ और सफ़र तय करना चाहती है. आशा है आप जल्दी ही कभी किसी स्टेशन पर साधारण डब्बे में मिलेंगे.

राहुल जी, बिहार की जनता बहुत भोली है,यह वही धरती है जहाँ ज्ञान  की प्राप्ति हो जाने पर रत्नाकर वाल्मीकि बन जाता है और ज्ञान की तलाश में सिद्धार्थ सभी प्रकार के राजसी बैभव एवं सांसारिक सुखों  को त्याग कर ज्ञान की तलाश में  निकल जाता है.  राहुल जी, इस धरती को नालंदा की धरती होने का गौरव प्राप्त  है जिसने  विश्व को सदियों पूर्व  ज्ञान से साक्षात्कार करवाया था. हम बिहारी अपने जीवन में रात्रि प्रहार को इस विश्वाश के साथ जी रहे हैं की सबेरा होने को है और हमने आपमें उषा की किरण को देखा है. जिस तरह से पिछले कुछ महीनों से आप लगातार बिहार के विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं और लगातार बिहार आ रहे हैं वह प्रशंशनीय है. हम सब आपकी मजबूरी को समझ रहे हैं की आपके हाथ आचार संहिता के बंधन में बंधे हैं नहीं तो बिहार की जनता को आपसे बहुत कुछ मिल जाता. अब  चुनाव भी ख़तम हो गए हैं और सारे बंधन भी नतीजों के साथ ही टूट गए हैं, अब बिहार आपकी रह देख रहा है.

राहुल जी, साधारण और भोली सी दिखने वाली यह जनता सबकुछ असाधारण नजरिये से देखने की मेधा रखती है, इसने कहीं ना कहीं  अपने आप को ठगा महसूस किया होगा. जाहिर है इसमें मीडिया का आपके प्रतिकूल प्रचार भी एक कारण है. इसने आपको नरेगा में श्रमदान करते दिखाया मगर आपकी भावनाओ को नहीं दिखाया. उलटे इन्होने आपकी टोकरी को दिखाया जो प्लास्टिक की थी, इन्होने आपके चेहरे के पसीने को  नहीं दिखाया बल्कि आपके पैरो के कीमती जूतों की तुलना उन मजदूरों के नंगे पैरों से किया. इसने आपके दिल में दबे वजन को नहीं दिखाया मगर आपकी टोकरी में मजदूरों की तुलना में कम वजन दिखाया.   मुझे तो यह पूरी साजिश सरकार द्वारा प्रायोजित लगती है. आपके सारे प्रयास एवं त्याग सरकार प्रायोजित दुष्प्रचार के शिकार हो गए. मगर शायद सरकार को यह नहीं पता है की ईमानदारी से किये गए प्रयास एक ना एक दिन फलित होंगे आप बस अपना प्रयास जारी रखे.  मैंने कहीं पढ़ा है कि आप भी बापू की तरह गीता  और रामायण में काफी बिश्वास रखते है. कड़ी मेहनत और  इमानदार कोशिश के बावजूद मिली इस करारी हर के समय गीता के अध्याय २ के ४७वें श्लोक से और बढ़िया क्या कहा जा सकता है.
                                              "कर्मण्यवाधिकारस्ते   मा फलेषु  कदाचन
                                                कर्मफलहेतुर्भुमा ते संगोअस्त्वकर्मणि "
राहुल जी आशा है  आपकी कोशिशें बिना किसी परिणाम की परवाह किये पूर्ववत जारी रहेंगी. और मुझे पूरा विश्वाश है की आप चाहे किसी के बुलावे पर आये ना आये, बिहार की जनता जब जब आपको बुलाएगी आप बागवान बिष्णु की तरह नंगे पाँव दौरे चले आयेंगे.

आपकी  शुभाकांक्षी
बिहार की जनता



  
   


  
    

1 टिप्पणी:

  1. राहुल गाँधी के नाम एक सार्थक चिट्टी /
    गरीबो के खाना मत खाए
    गरीबों के घर खाना कैसे पहुंचे
    इस पर मंथन करने की ज़रूरत है /
    कभी मेरे भी ब्लॉग पर आये /

    http://babanpandey.blogspot.com

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