फिर आज़ादी की तारीख आयी है
सत्ता के गलियों में जश्न मनाये जायेंगे
कुछ पंछी लाये जायेंगे पिंजरों में
फिर खुले आमान में आज़ाद किये जायेंगे
आज़ादी के प्रतीक चिन्हों से
नारे बड़े बड़े लगाये जायेंगे
धूमिल धुँधली थकी आँखों को
सुनहरे ख्वाब दिखाए जायेंगे
कुछ बातें होंगी, कुछ भूले याद लिए जायेंगे
कुछ तमगे बंटेंगे, कुछ घाव सहलाये जायेंगे
कुछ वादे होंगे रोटी के भूखो से
बेघरों के घर के आस दिलाये जायेंगे
वादे तो वादे है, सब भूल जायेंगे
फिर कल से सब जीवन संघर्ष में लग जायेंगे
विशिष्ठ आज़ादी विशिष्ठों को मुबारक
हम फिर कभी अपनी आज़ादी मनाएंगे
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