मंगलवार, 21 सितंबर 2010

शहीद का बेटा

                       शहीद का बेटा

एक एक कर गुजर गए सारे ही त्यौहार  माँ
छुट्टी लेकर कब आयेंगे पापा अबकी बार माँ

बात बात में माँ तू आजकल जाने कहाँ खो जाती है
कहीं घुमने कहेने पे जाने क्यूँ रोने लग जाती है
कहाँ गयी मुस्कान तेरी कहाँ गया तेरा प्यार माँ
छुट्टी लेकर कब आयेंगे पापा अबकी बार माँ

क्यूँ तुने बिंदिया लगाना कुछ महीनो से छोड़ दिया
जिसमें था सिन्दूर माँग का उस डिबिया को तोड़ दिया
बिछिया, कंगन, पायल बिन तू लगती है बीमार माँ
छुट्टी लेकर कब आयेंगे पापा अबकी बार माँ

आंसू रोक नहीं पाई माँ, सुन तुतलाती बातों को
आ सीने से लग जा लाल, बोली फैलाकर बाँहों को
आँख पोंछ तब मुन्ना  बोला, होना ना लाचार माँ
छुट्टी लेकर कब आयेंगे पापा अबकी बार माँ

तुने तो कमजोर समझ कर, मुझसे सब छुपा लिया
कल विद्यालय में आचार्य जी ने सबकुछ  मुझे बता दिया
जान सच्चाई सारी मुझको गर्व हुआ आपार माँ
छुट्टी लेकर कब आयेंगे पापा अबकी बार माँ

तेरा दूध पिया है मैंने और आंचल में तेरे लेटा हूँ
बापू के सारे सपनों को कर  दूंगा साकार माँ
छुट्टी लेकर कब आयेंगे पापा अबकी बार माँ

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